छत्तीसगढ के रायपुर जिले के खेतीहर परिवारों में उत्प्रवास की समस्या

 

डाॅ अर्चना सेठी1 , डाॅ. बी.एल. सोनेकर

1 सहायक प्राध्यापक, अर्थषास्त्र अघ्ययनषाला, प्ंा रविषंकरश्षुक्ल विष्वविद्यालय, रायपुर

2सह-प्राध्यापक, अर्थषास्त्र अध्ययनषाला, पं. रविषंकर षुक्ल विष्वविद्यालय, रायपुर (..)

*Corresponding Author E-mail:  sonekarptrsu@gmail.com

 

ABSTRACT:

उत्प्रवास केवल जनसंख्या की गतिशीलता को ब्यक्त करता है अपितु संबंधित क्षेत्र की सामाजिक आर्थिक स्थ्तिि एवं वर्तमान संसाधनों पर जनसंख्या का दबाव ब्यक्त करता है।जनसंख्या परिवर्तन में प्रजननता मत्र्यता की भांति उत्प्रवास की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है सामान्यतः पुरुषों के प्रवास में आर्थिक कारण की प्रबलता होती है वहीं महिला प्रवास में वैवाहिक एवं पारिवारिक कारण उत्तरदायी होता है प्रस्तुत शोध का उददेष्य उत्प्रवासी श्रमिकों के पलायन की प्रकृति एवं कारणों का अध्ययन करना षैक्षणिक स्तर एवं आर्थिक क्रियाकलापों का अध्ययन करना तथा उत्प्रवासीे श्रमिकों के समस्याओं का अध्ययन कर उत्प्रवास रोकने हेतु आवष्यक सुझाव प्रस्तुत करना है अध्ययन हेतु रायपुर जिले के 2017.18 के 200 परिवार का सर्वेक्षण किया गया उत्प्रवासियों से अनुसूची द्धारा जानकारी एकत्र की गई रायपुर जिले के 4 विकासखंडों से 10 गांवों का चयन दैवनिदर्षन पद्धति द्धारा किया गया प्रत्येक विकासखंड से 10 ग्राम का  चयन तथा प्रत्येक ग्राम से 05  परिवारों का चयन दैवनिदर्षन पद्धति द्धारा किया गया हैं।इस प्रकार कुल 200 परिवार का चयन किया गया।200 परिवारों में से 670 श्रमिकों ने उत्प्रवास किए 2017.18 में सर्वेक्षित परिवार के 670 श्रमिकों ने उत्प्रवास किया जिसका पुरुष 54ण्18  एवं 45ण्82 प्रतिषत महिला थे कुल उत्प्रवासित श्रमिकों का 3ण्23 प्रतिषत जिले के अंदर उत्प्रवास किये 3ण्73 प्रतिषत जिले के बाहर तथा 93ण्73 प्रतिषत राज्य के बाहर उत्प्रवास किये सर्वेक्षित परिवार के उत्प्रवास करने वाले श्रमिक 717 थे जिसका 51ण्60 प्रतिषत पुरुष तथा 48ण्40 प्रतिषत महिला थेे गंतब्य स्थल में उत्प्रवासित श्रमिकों का सर्वाधिक 29ण्25 प्रतिषत भवन निर्माण 26ण्27 प्रतिषत ईंटभटठा 24ण्48 प्रतिषत सडकनिर्माण 15ण्07 प्रतिषत उद्योग एवं 2ण्69 प्रतिषत होटल एवं घरेलू कार्य में संलग्न लारेंज वक्रसे यह स्पष्ट है कि उत्प्रवासित श्रमिकों की विभिन्न ब्यवसाय में क्रियाशीलता मेंअसमानता है गिनी गुणांक सूचकांक 0ण्43 है गांव के लोगों को गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार प्रतिबö है तथा अनेक कार्यक्रम शासन संचालित कर रही है इसमें भारत निर्माण तथा मनरेगा प्रमुख है उत्प्रवासित श्रमिकों को गंतब्य स्थल पर अनेक कठिनाइयों का सामना करना पडता है कई बार उन्हें बंधक बनाकर उनका शोषण किया जाता है।उत्प्रवास रोकने के लिए उन्हें गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराया जाय

KEYWORDS: पलायनआर्थिक, षक्तिकरण, प्रवास।ण्

 

 

 

प्रस्तावना:-

जहां प्रवास होता है एवं जहां से उत्प्रवास होता है दोनों स्थान सामाजिक एवं आर्थिक रुप से प्रभावित होता है।प्रवास किसी एक कारण में होने वाले वाले घटक का परिणाम नही है प्रवास अनेक कारण से प्रभावित होता है।प्रवास मुख्यतः 4 स्तर पर होता है।1 गांव से गांव 2 गांव से नगर 3 नगर से नगर 4 नगर से गांव भारत एवं छत्तीसगढ में मुख्यतःगांव से नगर की ओर पलायन पाया जाता है सामान्यतः पुरुषों के प्रवास में आर्थिक कारण की प्रबलता होती है वहीं महिला प्रवास में वैवाहिक एवं पारिवारिक कारण उत्तरदायी होता है।भारत की जनसंख्या का आधा हिस्सा महिलाओं की है।छत्तीसगढ की श्रमशक्ति में महिला श्रमशक्ति का बहुत बडा हिस्सा है 2001 में कुलश्रमशक्ति का 25ण्68 प्रतिशत महिलाश्रमशक्ति था जनगणना 1901 में भारत की 90 प्रतिषत जनसंख्या ग्रामीणक्षेत्र में निवास करती थी वह 1951 में यह 83 प्रतिषत हो गया औद्योगीकरण के कारण यह वर्तमान में 70 प्रतिषत से कम हो गया।रोजगार की तलाष में लोग क्रमषः षहरों की ओर प्रवास कर गये कृषिभूमि के घटने तथा आबादी बढने के कारण अधिकांष मजदूर रोजीरोटी कमाने षहर में पलायन कर गए।षिक्षा के विस्तार एवं गांवों में रोजगार की अनुपलब्धता षहरों की ओर पलायन का प्रमुख कारण है।महिला षिक्षा का विस्तार एवं महिलाओं में आर्थिक सषक्तिकरण की लालसा षहरों की ओर पलायन का मुख्य कारण है

 

अध्ययन का उददेश्य

प्रस्तुत षोध का निम्नलिखित उददेष्य है

1 उत्प्रवासी श्रमिकों के पलायन की प्रकृति एवं कारणों का अध्ययन करना

2 उत्प्रवासी श्रमिकों के षैक्षणिक स्तर एवं आर्थिक क्रियाकलापों का अध्ययन करना

3 उत्प्रवासीे श्रमिकों के समस्याओं का अध्ययन कर उत्प्रवास रोकने हेतु आवष्यक सुझाव प्रस्तुत करना

 

शोध पद्धतिः

समंकों का संकलन: प्रस्तुत अघ्ययन प्राथमिक समंकों पर आधारित है अध्ययन हेतु रायपुर जिले के 2017.18 के 200 परिवार का सर्वेक्षण किया गया उत्प्रवासियों से अनुसूची द्धारा जानकारी एकत्र की गई रायपुर जिले के 4 विकासखंडों से 10 गांवों का चयन दैवनिदर्षन पद्धति द्धारा किया गया प्रत्येक विकासखंड से 10 ग्राम का  चयन तथा प्रत्येक ग्राम से  05 परिवारों का चयन दैवनिदर्षन पद्धति द्धारा किया गया हैं 200 परिवारों में से 670 श्रमिकों ने उत्प्रवास किए

 

आंकडों का विश्लेषणः

आंकडों के विष्लेषण हेतु प्रतिषत तालिका रेखाचित्रों एवं उत्प्रवासित श्रमिकों का विभिन्न ब्यवसाय में वितरण हेतु गिनी गुणांक का उपयोग किया गया है

 

अध्ययन क्षेत्रः अध्ययन हेतु रायपुर जिला का चयन किया गया है जहां से उत्प्रवास में निरंतर वृद्धि हो रही है यह अध्ययन 2013.14 के आंकडों पर आधारित है

 

षोध साहित्य का अध्ययन

सिद्दीकी 2004 इन्होंने अपना अध्ययन छत्तीसगढ के रायपुर एवं दुर्ग जिले के संदर्भ में किया तथा अध्ययन हेतु दोनों जिलों से 220 उत्प्रवासित श्रमिकों का चयन अनुसूची द्वारा दैवनिदर्षन द्वारा किए प्रत्येक जिले से 110 उत्प्रवासित श्रमिकों की जानकारी एकत्र किये तथा बताया कि उत्प्रवासित श्रमिकों का अर्थब्यवस्था में बहुत प्रभाव पडता है ये उत्प्रवासित श्रमिक निम्न आयवर्ग के होते है जो खेती के समय में घर वापिस जाते हैं और खेती के अतिरिक्त समय में बाहर प्रवास कर जाते है उत्प्रवासित श्रमिकों का कोई संघ नहीं होता और ना ही इनको कानून की कोई जानकारी होती है जिसके कारण ये षोषण के शिकार होते है

 

गुरुंग एवं अधिकारी 2004 ने अपने अध्ययन में बताया कि नेपाल से बहूत सारे श्रमिक रोजगार हेतु खाडी के देष  एवं  भारत में प्रवास कर जाते है।ये ठंड में गरम कपडे की बिक्री एवं अन्य कार्य करते है ये अपनी आय का बहुत बडा अंष भेाजनं षिक्षा एव  अन्य दैनिक आवश्यकता पर ब्यय कर देते है उत्प्रवासित श्रमिकों की कार्य की दशाएं अच्छी नहीं होती

 

दैस एवं जयासुन्दर 2004 ने अपना अध्ययन श्रीलंका के संदर्भ में किया तथा बताया कि उत्प्रवासित श्रमिकों की कार्य की दशाएं अच्छी नहीं होती एवं संध द्वारा ही उत्प्रवासित श्रमिकों की षोषण को रोका जा सकता है एवं साथ ही कानून की जानकारी द्वारा उत्प्रवासित श्रमिकों की शोषण को कम किया जा सकता है

 

रानी एवं षैलेन्द्र;2001द्ध ने अपने अध्ययन में बताया कि भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में मौसमी बेरोजगारी पायी जाती है कृषि के अतिरिक्त दिनों में श्रमिक कम उत्पादकता सीमांत जोत निम्न आय रोजगार की कमी के कारण शहरी क्षेत्र में पलायन कर जाते है के अतथा कृषि के समय पुनः धर लौट आते है

 

इरुदयारंजन एवं जचारह ;1997द्ध  ने अपने अध्ययन केरल में प्रवासित श्रमिकों के संदर्भ में बताया कि पिछले कुछ दशकों से केरल में प्रवास बढा है उच्च मानव विकास सूचकांक ऊची मजदूरी रोजगार की उपलब्धता के कारण उततरप्रदेष बिहार छत्तीसगढ झारखंड उडीसा तथा पूर्वोत्तर राज्यों से बडी संख्या में श्रमिक केरल में प्रवासित होते है केरल में गरीबी निवारण एवं बेरोजगारी उन्मूलन कार्यक्रम के बडे पैमाने पर संचालित होने के कारण उन्हें आसानी से रोजगार मिल जाता है

 

ओबेराय एवं सिंह ;1980द्ध  इन्होंने अपना अध्ययन पंजाब के लुधियाना जिले के संदर्भ मे किया तथा बताया प्रवास 3 प्रकार का होता है 1 देष  सें बाहर प्रवास 2 देष  के अंदर प्रवास 3 हरितक्रांति वाले राज्य में प्रवास।गांव से षहर प्रवास रोजगार के कारण होता है लेकिन गांव से गांव प्रवास राज्य के भीतर पाया जाता है

 

उत्प्रवासित श्रमिकों की सामाजिक आर्थिक स्थ्तिि

 

तलिका 01 में उत्प्रवासित श्रमिकों का वितरण उत्प्रवास के कारण के आधार पर किया गया है सर्वाधिक 38ण्6 प्रतिषत ने निम्न मजदूरी को पलायन का कारण माना है 32ण्3 प्रतिषत ने रोजगार का अभाव को पलायन का कारण माना है 23ण्2 प्रतिषत ने गरीबी को पलायन का कारण माना है  3ण्2 प्रतिषत ने परिवारिक समस्या को तथा 2ण्7 प्रतिषत ने अन्य ततवों को पलायन का कारण माना है

 

 

2013.14 में सर्वेक्षित परिवार के 670 श्रमिकों ने उत्प्रवास किया जिसका जिसका पुरुष 51ण्84  एवं 48ण्16 प्रतिषत महिला थे  कुल उत्प्रवासित श्रमिकों का 3ण्23 प्रतिषत जिले के अंदर उत्प्रवास किये 3ण्73 प्रतिषत जिले के बाहर तथा 93ण्73 प्रतिषत राज्य के बाहर उत्प्रवास किये।सर्वेक्षित परिवार के उत्प्रवास करने वाले श्रमिक 717 थे जिसका 51ण्60 प्रतिषत पुरुष तथा 48ण्40 प्रतिषत महिला थे तालिका 2

छत्तीसगढ में उत्प्रवास कृषि कार्यपर निर्भर करता है श्रमिक धान कटाई से लेकर धान बुआई तक उत्प्रवासित होते है यह प्रक्रिया सितम्बर अब्टूबर से प्रारंभ होकर अपे्रल मई तक वापस घर जाते है 8ण्8 प्रतिषत श्रमिक सितम्बर माह में अक्टूबर में 15ण्5 प्रतिषत श्रमिक नवंबर माह में 43ण्5 प्रतिषत श्रमिक उत्प्रवास किये 32ण्4 प्रतिषत श्रमिक दिसम्बर माह में उत्प्रवास किये।4ण्2 प्रतिषत श्रमिक अप्रेल माह में 13ण्2 प्रतिषत श्रमिक मई माह में 55ण्2 प्रतिषत जून माह में तथा 27ण्4 प्रतिषत श्रमिक जुलाई माह में वापिस घर लौटे

 

तलिका 03 में  उत्प्रवासित श्रमिकों का कार्य के धंटे के अनुसार वितरण दर्शाया गया है।सर्वाधिक  44ण्प्रतिषत श्रमिक 09 घंटे कार्य करते है 25ण्प्रतिषत श्रमिक 10 घंटे 15ण्0 प्रतिषत श्रमिक 08 घंटे कार्य करते है तथा 15ण्5 प्रतिषत श्रमिक 10 से अधिक घंटे कार्य करते है

 

उत्प्रवासित श्रमिकों का 68ण्4 प्रतिषत विवाहित 30ण् 4 प्रतिषत अविवाहित 1ण्2 प्रतिषत विधवा विधुर परित्यक्ता है कुल उत्प्रवासित श्रमिकों का 36ण्2 प्रतिषत अनुसुचित जाति 10ण्9 प्रतिषत जनजाति 43ण्2 प्रतिषत अन्य पिछडा वर्ग तथा 9ण्7 प्रतिषत अनारक्षित वर्ग से हैं

 

उत्प्रवासित श्रमिकों का 51ण्2 प्रतिषत षिक्षित है 48ण्8 प्रतिषत अषिक्षित है षिक्षित श्रमिकों का 41ण्5 प्रतिषत केवल साक्षर 42ण्प्रतिषत प्राथमिक स्तर तक साक्षर तथा 7ण्2 प्रतिषत हाई स्कूल एवं 6ण्4 प्रतिषत हायर सेकेण्डरी तथा 2ण्1 प्रतिषत स्नातक स्तर तक साक्षर है

 

उत्प्रवासित श्रमिकों का 25ण्4 प्रतिषत 0. 14 आयु वर्ग के 65ण्3 प्रतिषत कार्यषील आयुवर्ग 15.59 आयुवर्ग के तथा 9ण्3 प्रतिषत श्रमिक 59 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के है

                                                

 

 

उत्प्रवासित श्रमिकों का 93ण्73 प्रतिषत राज्य से बाहर उत्प्रवासित हुए जिसका सर्वाधिक 16ण्24 प्रतिषत उत्तरप्रदेष हरियाणा 13ण्54 प्रतिषत दिल्ली 11ण्62 प्रतिषत तथा पंजाब 9ण्87 प्रतिषत उत्प्रवासित हुए सबसे कम उत्प्रवास केरल 4ण्77 प्रतिशत बिहार 3ण्34 प्रतिषत तथा कर्नाटक राज्य में 8ण्59 प्रतिषत उत्प्रवास किए तालिका 4

 

उत्प्रवासित श्रमिक 100 से 250 दिनों तक के लिए उत्प्रवास करते है उत्प्रवासित श्रमिकों का 4ण्5 प्रतिषत 100 दिनों के लिए  23ण्1 प्रतिषत श्रमिक 100 से 150 दिनों के लिए 35 प्रतिषत श्रमिक 150 से 200 दिनों के लिए तथा 37ण्5 प्रतिषत श्रमिक 200से 250 दिनों के लिए उत्प्रवास किये उत्प्रवासित श्रमिकों का 42ण्6 प्रतिषत स्वयं तथा 57ण्3 प्रतिषत ठेकेदारों के माध्यम से उत्प्रवास किए उत्प्रवासित श्रमिक उत्प्रवास के लिए बस तथा रेल का उपयोग करते हंै 73ण्2 प्रतिषत श्रमिक बस एवं रेल दोनों माध्यम 12ण्4 प्रतिषत ने बस के öारा तथा 14ण्4 प्रतिषत श्रमिकों नें रेल का उपयोग उत्प्रवास के लिए किया उत्प्रवासित श्रमिक अधिकतर बाहर राज्य से आगामी वर्ष के लिए अग्रिम सुविधा लेते है उत्प्रवासित श्रमिकों का 28ण्6 प्रतिषत श्रमिक अग्रिम सुविधा लिए षेष 71ण्4 प्रतिषत श्रमिक स्वतंत्र रुप से उत्प्रवास किए।उत्प्रवासित श्रमिकों का उत्प्रवास का कारण गरीबी एवं निम्न आय एवं रोजगार का अभाव है उत्प्रवासित श्रमिकों का 46ण्7 प्रतिषत श्रमिक परिवार की र्वािर्षक आय 20000 रु वार्षिक से कम है परिवार का औसत आकार 5सदस्य या उससे अधिक है अर्थात प्रतिब्यक्ति वार्षिक आय 5000रु या उससे कम ही है 53ण्3 प्रतिशत श्रमिकों की वार्षिक आय 20000रु से 30000रु तक है अर्थात प्रतिब्यक्ति वार्षिक आय 6000रु तक है

 

 

 

गंतब्य स्थल में उत्प्रवासित श्रमिकों की आथर््िाक क्रियाशीलता

 

   

 

उत्प्रवासित श्रमिकों का सर्वाधिक 29ण्25 प्रतिशत भवन निर्माण 26ण्27 प्रतिषत ईंटभटठा 24ण्48 प्रतिषत सडकनिर्माण 15ण्07 प्रतिषत उद्योग एवं 2ण्69 प्रतिषत होटल एवं घरेलू कार्य में संलग्न थे।कार्य स्थल पर इन्हें आवास झोपडी एवं पेयजल के अतिरिक्त कोईसुविधा उपलब्ध नहीं कराया जाता उत्प्रवासित श्रमिको उत्प्रवासित श्रमिक 100 से 250 दिनों तक के लिए उत्प्रवास करते है उत्प्रवासित श्रमिकों का 4ण्5 प्रतिषत 100 दिनों के लिए  23ण्1 प्रतिषत श्रमिक 100 से 150 दिनों के लिए 35 प्रतिषत श्रमिक 150 से 200 दिनों के लिए तथा 37ण्5 प्रतिषत श्रमिक 200से 250 दिनों के लिए उत्प्रवास किये।उत्प्रवासित श्रमिक 5000 रु से 40000रु तक बचत कर अपने घर लाते है उत्प्रवासित श्रमिकों का सर्वाधिक 50ण्3 प्रतिषत ने 20000रु तक बचत किया  7ण्प्रतिषत ने 40000रु तक बचत किया तथा 1ण्8 प्रतिषत ने बचत नहीें किया

 

 

 

         

 

लारेंज वक्रसे यह स्पष्ट है कि उत्प्रवासित श्रमिकों की विभिन्न ब्यवसाय में क्रियाशीलता मेंअसमानता है।गिनी गुणांक सूचकांक 0ण्43 है

 

उत्प्रवास रोकने के उपाय:

गांव के लोगों को गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार प्रतिबö है तथा अनेक कार्यक्रम शासन संचालित कर रही है इसमें भारत निर्माण तथा मनरेगा प्रमुख है उत्प्रवासित श्रमिकों को गंतब्य स्थल पर अनेक कठिनाइयों का सामना करना पडता है कई बार उन्हें बंधक बनाकर उनका शोषण किया जाता है।उत्प्रवास रोकने के लिए निम्नलिखित उपाय अमल में लाना चाहिए

 

1 गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराया जाय

2 उद्यमिता एवं कौशल उपाय

3 औद्योगिक प्रषिक्षण

4 स्वरोजगार के लिए प्रेरणा

5 स्वसहायता समूहों की स्थापना

6 कुटीर उद्योग धंधों की स्थापना

7 पूरक उद्योगों की स्थापना जैसे पषुपालन मुर्गीपालन रेषमकीट पालन मत्स्यपालन आदि

8 कानून की जानकारी

 

निष्कर्षः

उत्प्रवास की समस्या छत्तीसगढ के ग्रामीण क्षेत्र में पाया जाता है जहां से उत्प्रवास करते है और जहां प्रवास होता है दोंनो स्थानों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति को प्रभावित करते है छत्तीसगढ में अधिकांशतः ग्राम से नगर की ओर पलायन हेता है उत्प्रवास कर ये श्रमिक जहां कार्य करते है वहां उन्हें अनेक समस्याओं का सामना करना पडता है कई बार उन्हें बंधक बनाकर उनका शोषण किया जाता है कई अतिरिक्त धंटे उनको कार्य करना पडता है आवास की कोई सुविधा नही होती उत्प्रवास को रोकने हेतु शासन अनेक योजनाएं क्रियान्वित कर रही है जिससे गाांव के लोगों को गाांव मंे ही रोजगार उपलब्ध हो।शासन के प्रयास के साथ ही उत्प्रवास करने वाले श्रमिकों का जागरुक होना भी अनिवार्य है

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Received on 18.08.2018                Modified on 29.09.2018

Accepted on 08.10.2018            © A&V Publications All right reserved

Int. J. Ad. Social Sciences. 2018; 6(4):187-194.